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» » संसद का शीतकालीन सत्र संपन्न: ऐतिहासिक सुधारों और 121% उत्पादकता के साथ विदा हुआ सदन


 नई दिल्ली: भारतीय संसद का शीतकालीन सत्र 2025, जो 1 दिसंबर को शुरू हुआ था, शुक्रवार (19 दिसंबर) को अनिश्चित काल के लिए स्थगित हो गया。 इस 19 दिवसीय सत्र में कुल 15 बैठकें हुईं, जो भारतीय लोकतंत्र के लिए कई मायनों में ऐतिहासिक रहीं。 सदन ने न केवल रिकॉर्ड उत्पादकता दर्ज की, बल्कि देश की अर्थव्यवस्था और ग्रामीण ढांचे को बदलने वाले 8 महत्वपूर्ण विधेयक भी पारित किए。

सत्र की मुख्य उपलब्धियां: ये 8 विधेयक बने कानून

इस सत्र में सरकार ने कुल 10 विधेयक पेश किए थे, जिनमें से 8 को दोनों सदनों की मंजूरी मिल गई है。 इनमें सबसे प्रमुख निम्नलिखित हैं:

विकसित भारत - जी राम जी (VB-G RAM G) अधिनियम, 2025: इस सत्र की सबसे बड़ी खबर रही मनरेगा (MGNREGA) का रिप्लेसमेंट。 इस नए कानून के तहत ग्रामीण परिवारों को अब साल में 100 के बजाय 125 दिनों के रोजगार की कानूनी गारंटी दी गई है。

शांति (SHANTI) विधेयक, 2025: परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में यह एक बड़ा क्रांतिकारी कदम है। इसके जरिए पहली बार नागरिक परमाणु ऊर्जा क्षेत्र को निजी कंपनियों के लिए खोल दिया गया है。

बीमा कानून (संशोधन) विधेयक, 2025: बीमा क्षेत्र में विदेशी निवेश (FDI) की सीमा को 74% से बढ़ाकर 100% कर दिया गया है, जिससे इस क्षेत्र में वैश्विक पूंजी और प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी。

निरसन और संशोधन विधेयक, 2025: सरकार ने 'कानूनी सफाई' जारी रखते हुए लगभग 65 पुराने और अप्रासंगिक हो चुके कानूनों को निरस्त कर दिया है。

टैक्सेशन और अन्य बिल: मणिपुर जीएसटी (द्वितीय संशोधन), केंद्रीय उत्पाद शुल्क (संशोधन) और स्वास्थ्य सुरक्षा से नेशनल सिक्योरिटी सेस बिल को भी पारित किया गया。

रिकॉर्ड उत्पादकता और विशेष चर्चाएं

लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला और राज्यसभा सभापति सी.पी. राधाकृष्णन ने सदन की कार्यवाही के दौरान सदस्यों के सहयोग की सराहना की।

लोकसभा: निचले सदन की उत्पादकता 111% रही。

राज्यसभा: उच्च सदन ने 121% उत्पादकता के साथ लगभग 92 घंटे काम किया。

सत्र के दौरान 'वंदे मातरम' के 150वें वर्ष और 'चुनावी सुधारों' पर विशेष चर्चा हुई, जिसमें 80 से अधिक सदस्यों ने हिस्सा लिया。 हालांकि, विपक्ष ने दिल्ली-NCR में वायु प्रदूषण और VB-G RAM G बिल के कुछ प्रावधानों को लेकर सदन में हंगामा भी किया。

निष्कर्ष

संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने सत्र को 'अत्यंत उत्पादक' बताते हुए कहा कि पारित किए गए कानून भारत को 2047 तक 'विकसित भारत' बनाने की दिशा में मील का पत्थर साबित होंगे。

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