नई दिल्ली/हांसी: दिसंबर का महीना न केवल क्रिसमस और नए साल की खुशियाँ लेकर आता है, बल्कि शेयर बाज़ार के निवेशकों के लिए भी अक्सर यह ‘कमाई का तोहफा’ साबित होता है। शेयर बाज़ार की भाषा में इसे 'सांता रैली' (Santa Rally) कहा जाता है।
आज 23 दिसंबर 2025 को जब सेंसेक्स 85,500 के ऐतिहासिक स्तर को पार कर चुका है, तो हर निवेशक के मन में एक ही सवाल है—क्या इस बार भी सांता बाज़ार में तेज़ी की सौगात लाएंगे?
क्या होती है सांता रैली?
सांता रैली उस ऐतिहासिक रुझान (Trend) को कहते हैं, जब दिसंबर के आखिरी पांच ट्रेडिंग दिनों और नए साल के पहले दो दिनों में शेयर बाज़ार में ज़बरदस्त तेज़ी देखने को मिलती है। बाज़ार के जानकारों का मानना है कि इस दौरान बाज़ार अक्सर 'बुलिश' (तेज़ी) मोड में रहता है।
क्यों आती है बाज़ार में यह तेज़ी?
इसके पीछे कई मनोवैज्ञानिक और तकनीकी कारण होते हैं:
संस्थागत निवेशकों (FIIs) की छुट्टी: साल के अंत में बड़े विदेशी निवेशक छुट्टियों पर होते हैं, जिससे बाज़ार में बिकवाली का दबाव कम हो जाता है।
रिटेल निवेशकों का उत्साह: नए साल की सकारात्मकता और बोनस के पैसे का बाज़ार में आना तेज़ी को बढ़ावा देता है।
टैक्स हार्वेस्टिंग: कई निवेशक अपने पोर्टफोलियो को टैक्स बचाने और अगले साल की प्लानिंग के लिए बैलेंस करते हैं।
2025 की स्थिति: क्या कहते हैं आंकड़े?
इस साल भारतीय बाज़ार पहले से ही मज़बूत स्थिति में है। निफ्टी और सेंसेक्स अपने ऑल-टाइम हाई के करीब हैं। जानकारों का कहना है कि अगर यह रैली जारी रहती है, तो जनवरी के पहले हफ्ते तक बाज़ार नए कीर्तिमान स्थापित कर सकता है।
निवेशकों के लिए सलाह: सावधानी भी है ज़रूरी
सांता रैली का मतलब यह कतई नहीं है कि आप बिना सोचे-समझे किसी भी शेयर में पैसा लगा दें।
क्वालिटी शेयर्स पर ध्यान दें: टाटा स्टील, टीसीएस (TCS) और रिलायंस जैसे मज़बूत फंडामेंटल वाले शेयरों पर नज़र रखें।
प्रॉफ़िट बुकिंग: अगर आपको अच्छा मुनाफ़ा मिल रहा है, तो थोड़ी-बहुत प्रॉफ़िट बुकिंग करना समझदारी है।
जल्दबाज़ी न करें: रैली के चक्कर में बहुत महंगे (Overvalued) शेयर खरीदने से बचें।
निष्कर्ष: सांता रैली बाज़ार में सकारात्मकता का संचार करती है, लेकिन एक स्मार्ट निवेशक वही है जो तेज़ी का आनंद लेते हुए अपनी जोखिम क्षमता (Risk Capacity) का भी ध्यान रखे।




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